Hostel ki ek horror night । होस्टल की एक डरावनी रात
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| (यह एक काल्पनिक कहानी है, केवल मनोरंजन हेतु लिखित) |
" अरे क्या हुआ? " किसी ने कहा , ये अमित था जो मेरे सामने के कमरे में रहता था। उसने कहा - 09: 00 बज गए हैं भाई खाना नही खाना क्या? मैंने बोला हां यार चल तूने तो मुझे डरा ही दिया था।
दोस्तों मैं इसलिए अकेले रह रहा था क्योंकि मेरे रूममेट मयंक ने मेरा रूम छोड़ दिया था और अपने दोस्त मृदुल के साथ रहने लगा था।
हम मेस (भोजनालय) में गए । मैंने राजमा चावल लिया और प्लेट टेबल पर रख कर जल्दी जल्दी खाने लगा। "अरे आज तो तू राक्षसों की तरह खा रहा है" - मुकेश ने कहा , ये अमित का रूममेट था जो जल्दी खाने के लिए आ गया था।
मैंने उसकी तरफ ध्यान नही दिया। क्योंकि कॉलेज से लेट आने के बाद मैं सो गया था और बस कुछ समय पहले ही पढ़ना शुरू किया था मैं डिस्टर्ब नही होना चाहता था, यद्यपि मुकेश भी मेरा दोस्त ही था।
अभी सब खाना खा रहे थे लेकिन मैं जल्दी ही रूम की तरफ दौड़ गया । जाते समय मैने नोट बुक टेबल पर रख दी थी लेकिन वह मुझे नहीं मिली। मैं ढूंढने लगा । मुझे लगा ये मुकेश का काम है। मैनें मुकेश को फ़ोन किया लेकिन नेटवर्क काम नही कर रहा था। फिर मैंने अमित को फ़ोन किया उसने हैलो बोला तो मैंने कहा यार मुकेश कहां है ? उसने कहा वो और मुकेश ग्राउंड में टहलने गए हैं ग्राउंड होस्टल से 300 मीटर दूर था। अब मुझे लगा ये मुकेश का काम नही है। मै कॉरिडोर में गया लेकिन सारे रूम अभी बंद थे कहीं कोई नहीं था। फिर मैंने टॉयलेट में चेक किया लेकिन न बुक मिली न कोई और। अब मैं परेशान हो गया और रूम की तरफ बढ़ा जैसे ही रूम में पहला कदम रखा कि लाइट चली गई, मैं इंजीनियरिंग के फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट था। "मुझे यहाँ रहते 2 महीने हो गए हैं लेकिन ऐसा कभी नही कि लाइट... यही सब सोंच रहा था कि मुझे किसी के प्यार से बुलाने की आवाज सुनाई दी- "कौशल.......!"आवाज में मधुरता थी, और कौशल मेरा ही नाम था। ऐसे मुझे कोई नही बुलाता था ये किसी लड़की की आवाज थी । मेरे मन में डर और आशंका के साथ साथ उत्सुकता भी थी लेकिन मैने खुद को संभाला और उत्तर दिया- " हां कौन"?
- तभी लाइट आ गई ।
- मैनें देखा नोट बुक तो टेबल पर ही रखी थी ।
- किसने रखी? ?
- इधर उधर देखा तो कोई नही दिखा ।
- अभी भी कोई नही आया था।
- डर के मारे मेरा गला सूख गया था। मैंने पास रखी बोतल उठाई और पानी पिया।
- मैने नोट बुक खोली लेकिन ये क्या? ..................................................
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ये सब सुनकर होस्टल में भय का माहौल फैल गया। तभी मैंने अमित से कहा यार मैं आज तेरे रूम में सो जाता हूँ। उसने कहा ठीक है। तभी मुकेश को मजाक सुझा उसने सबसे पूछा -"आज कोई कौशल के रूम में अकेले सो सकता है? है किसी में दम? "
लेकिन कोई तैयार नही हुआ तभी किसी ने कहा अगर तेरे अंदर दम है तो तू ही सो के दिखा दे। उसने कहा ठीक है। (मुकेश इसलिए तैयार हो गया क्योंकि उसे गर्ल फ्रेंड से बात करनी होती )
अब मुकेश मेरे और मैं उसके कमरे में सो गए। सुबह तक सब ठीक था । शाम को हम होस्टल के नीचे लान में टहल रहे थे ।मुकेश अब भी मेरे रूम में था कुछ समय बाद हमने देखा कि वह बालकनी में खड़ा हमें टहलते देख रहा था। और बीच बीच में ही मोबाइल लेकर किसी से चैटिंग भी कर रहा था। शायद वो ये दिखाना चाहता था कि वह कितना बोल्ड है और हम कितने डरपोक। हमने उसे आवाज देकर नीचे बुलाया । अमित बालकनी से रूम की तरफ बढ़ने के लिए पीछे मुड़ा लेकिन तभी एकाएक वह बालकनी से नीचे गिर पड़ा। फिर हम सभी उसकी ओर दौड़ पड़े वार्डन को फ़ोन किया और उसे जल्द ही हॉस्पिटल ले गए वह बेहोश हो गया था। कुछ समय बाद लगभग रात 10 बजे होश आने पर उसने हमें बताया कि -
'हमने जैसे ही उसे आवाज दी वह पीछे मुड़ा तो उसे लगा कमरे में कोई और भी है उसने देखा कि रूम के पंखे से कोई मानव की छाया आकृति लटक रही थी । वह झूलते हुए अचानक उसकी तरफ तेजी से बढ़ी और मुकेश को लगा उसे किसी ने नीचे की ओर खींच लिया।'
ये सब वार्डन ने भी सुना । उस दिन के बाद से ही उस रूम को बंद करवा दिया गया।
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यदि कहानी अच्छी लगी तो comment जरूर करें। A horror painting | एक रहस्यमयी पेंटिंग 25 latest boys names for your baby |





Interesting story
ReplyDeleteThanks 🙏😊
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