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Mahisasura Mardini stotra ka arth | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्र का अर्थ

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अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥१॥ भावार्थ:   हे हिमालय पर्वत की पुत्री (पार्वती) ! धरती को आनंदित करने वाली, संसार को पुलकित करने वाली, नंदी के द्वारा वंदित, पर्वत राज विंध्याचल के शीश पर निवास करने वाली , विष्णु को आनंदित करने वाली । इंद्र के द्वारा पूजित हे भगवति !  आप नील कंठ भगवान शिव की भार्या हैं । आपका कुटुम्ब (परिवार) बहुत विशाल है। आप कल्याण करने वाली हैं । हे महिषासुर दैत्य का अंत करने वाली ! जिनके केश अत्यंत रम्यक (मनोहर) हैं, आप शैल पुत्री हैं । आपकी जय हो । आपकी जय हो। सुरवर वर्षिणि दुर्धर धर्षिणि दुर्मुख मर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिष मोषिणि घोषरते । दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥२॥   भावार्थ:  सुरपति इंद्र को समृद्ध देने वाली। दुर्धर नामक दैत्य या ऐसी बाधा जिसका अंत करना अत्यंत दुष्कर है, का अ...

पुराने शब्दों के नए अर्थ

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श ब्द वही रहते हैं अर्थ बदल जाते हैं। लोग शब्दों को लाभ लोभ के लालच में नया अर्थ दे देते हैं। जैसे कि एक बहु प्रचलित छोटा सा वाक्य है 'पुरानी सोंच' आपने भी कई बार प्रयोग किया होगा बातचीत मे? मैने भी कई बार प्रयोग किया है। यह शब्द ,शब्द नहीं ब्रह्मास्त्र है, अमोघ है। क्या आप नहीं मानते ? मै याद दिलाता हूं आपको। शायद आप अपने भीतर छुपी इस अपार शक्ति के प्रयोग करने की क्षमता को भूल चुके हैं। पिछले सप्ताह जब आपने किसी मूवी का ट्रेलर देखा था जिसमें संस्कृति से जुड़े पहलुओं पर प्रकाश डाला गया था। तब आपके दोस्त ने कहा यार कैसी मूवी देखता है तू? पुरानी सोंच ! और उसका ये कहना और आपकी संस्कृति निष्ठा का विचार विकार की भांति त्याग देना। यूहीं नही हो गया । बल्कि ये कथित ब्रह्मास्त्र के प्रहार से हुआ । जिसके चलाने के लिए दिमाग नही केवल मुहं मात्र खोलना है , और सामने वाले व्यक्ति विचार से असहमति दिखाते हुए बोल देना है 'पुरानी सोंच'! बस सामने वाला उसका अर्थ ' पुरानी सोंच मतलब घटिया सोच ' ही निकलेगा। और फिर इस ब्रह्मास्त्र से उतपन्न अग्नि को कूल बनकर शांत करने के लिए आप न...

A horror painting | एक रहस्यमयी पेंटिंग

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आ ज लाइब्रेरी में रोज की तरह शांति नहीं थी, इसलिए वह शांत जगह की तलाश करने लगा, क्योंकि उसे शांति से न्यूज़ पढ़ना अच्छा लगता था। आज उसे लाइब्रेरी की पुरानी दीवार के पास  बैठना पड़ा।  पुरानी दीवार के सामने दो किताबों से भरी अलमारियां रखी थीं । दोनों के बीच कुछ जगह भी थी, जहां एक टेबल रखी थी और उसके चारों तरफ बैठने के लिए कुर्सियां। टेबल के किनारे उसी दीवार  पर एक पुरानी खिड़की लगी थी, जिससे देखने पर यूकेलिप्टस के लंबे पेड़ों गहनता, ... पीछे ऊंची अरावली की एक पहाड़ी भी थी जससे उस कथित लिप्ट्स वन में प्रकाश की एक किरण भी मुश्किल से ही पहुंचती थी, जो किसी को भी रात में भयाक्रांत करने के लिए काफी थी, दिखाई देती थी। यद्यपि शांति की वजह से पढ़ने के लिए यह जगह बिल्कुल उपयुक्त थी फिर भी शायद ही कभी कोई यहां पढ़ना चाहता था । क्योंकि:- खिड़की के ऊपर एक अजीब सी पेंटिंग लगी हुई थी। उस पेंटिंग को जो भी देखता वो उसमें खो सा जाता था। भूमेश का ध्यान भी रह रह कर उसी पेंटिंग की तरफ जा रहा था। ऐसा क्या था उस पेंटिंग में? दो दिन बाद - आज भूमेश सुबह सोकर उठा ।उसने अपना मोबाइल उठाया उसके फ़ोन पर बहुत सार...

Hostel ki ek horror night । होस्टल की एक डरावनी रात

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(यह एक काल्पनिक कहानी है, केवल मनोरंजन हेतु लिखित) क्ला स टेस्ट शुरू ही होनें वाले थे कुछ दिनों में। मैं अपने होस्टल के कमरे में अकेले बैठ कर नोटबुक  पढ़ रहा था तभी पीछे से मेरे कंधे पर किसी ने हाथ रखा.......................................... मैं चौक गया।  " अरे क्या हुआ? " किसी ने कहा , ये अमित था जो मेरे सामने के कमरे में रहता था। उसने कहा - 09: 00 बज गए हैं भाई खाना नही खाना क्या? मैंने बोला हां यार चल तूने तो मुझे डरा ही दिया था।  दोस्तों मैं इसलिए अकेले रह रहा था क्योंकि मेरे रूममेट मयंक ने मेरा रूम छोड़ दिया था और अपने दोस्त मृदुल के साथ रहने लगा था। हम मेस (भोजनालय) में गए । मैंने राजमा चावल  लिया और प्लेट टेबल पर रख कर जल्दी जल्दी खाने लगा। "अरे आज तो तू राक्षसों की तरह खा रहा है" - मुकेश ने कहा , ये अमित का रूममेट था जो जल्दी खाने के लिए आ गया था। मैंने उसकी तरफ ध्यान नही दिया। क्योंकि कॉलेज से लेट आने के बाद मैं सो गया था और बस कुछ समय पहले ही पढ़ना शुरू किया था मैं डिस्टर्ब नही होना चाहता था, यद्यपि मुकेश भी मेरा दोस्त ही था।  अभी सब खाना खा रहे थे लेकि...

Raanu Mondal aur Media

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रानू मंडल रानू मंडल और मीडिया: रानू मंडल वह महिला जिसे मीडिया ने हाथों हाथ स्टार बना दिया। वह महिला जो स्टेशन पर भिक्षा मांगकर जीवन गुजार रही थी उसे रानू मंडल बना दिया मीडिया की इच्छा ने। लेकिन उस महिला ने क्या किया? ..इस बात का दिखावा कि वह अब सेलिब्रिटी हैं। आप उनसे इज्जत से पेश आएं... ओहो पहले तो भीख मांग रही थी आज सेलिब्रिटी बन रही है ..............! आप भी यही सोच रहे हैं न? 25 latest names for boys   How to start writing poem सोंचिये कल तक आप उसकी कितनी तारीफ कर रहे थे। और आज? अरे भाई अभी तक तो आपके रोंगटे खड़े हो रहे थे मीडिया की महानता का गुणगान करके: "अरे देखो कैसे मीडिया ने रोड-पति महिला को करोड़पति बना दिया। " तो अब क्या हो गया आपको ?आपने ही तो महान बताया मीडिया को तो महिला से महानता की आशा क्यों? वह तो महानता की भुक्तभोगी मात्र है। आखिर आप उसे ट्रोल करके, उसके बारे में वह सब लिखकर जिसे वह पढ़ भी नहीं सकती ,क्या दिखाना चाहते हैं? यही कि वह भिखारन बनने के ही लायक है। क्या आपको नहीं लगता की उसे कुछ समय देना चाहिए| यदि आप चाहते हैं कि उसके जै...